कौम प्रधान मुल्क में एक और कौम !

हिंदुस्तान के रोम-रोम में कौम-कौम का कीड़ा समाया है. पैदा होते ही नाम के साथ कौम चस्पा हो जाती है, मसलन चमन ‘पांडे’, छोगालाल ‘चौधरी’, या काजूभाई ‘पटेल’. फिर स्कूल में दाखिला लो फॉर्म में दूसरा ही कॉलम कहता है अपनी कौम लिखो. आगे नौकरी के लिये दरख्वास्त दो तो सरकार पूछती है, कौनसी कौम से हो. अगडी या पिछडी. अगडी में हो तो पीछे चले जाओ और पिछडी में हो तो आगे आ जाओ!

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शादी करने जाओ तो लडकी का बाप पूछता है कौन से कौम से हो. फिर कहता है आप तो हमारे वाली कौम से नहीं हो. आप लाख हाथ-पैर जोड के समझाओ कि ए मेरे सम्भावित ससुर आपकी बेटी की ज़िंदगी को मेरी काबिलियत संवारेगी, मेरी कौम नहीं. लेकिन ससुरा मानेगा नहीं.

लोग कहते हैं कि हमारा देश कृषि प्रधान है, लेकिन हमारा मानना है कि देश ‘कौम’ प्रधान है. क्योंकि यहाँ कोई  भी  नेता गांव के प्रधान से लेकर देश का प्रधानमंत्री कौम के नाम पे बन बैठता है. कौम इतनी उपयोगी चीज है कि इसको समतल करने के लिये आज दिन तक किसी ने आंदोलन नहीं किया. क्योंकि सभी कौम समतल हो जाएंगी तो सबका धरातल खिसक जाएगा, वोट वाली पेटिया रसातल में पहुंच जाएंगी. कौम एक ऐसा अवयव है जिसने बरसो तक हिंदुस्तान के दिमाग बिहार का दही कर डाला.

ऐसा नहीं है कि देश में कौम से परे लोग नहीं हैं. बहुत से लोग हैं जो दिन में सत्रह बार कौमवाद मिटाओ का नारा देते हैं और एक से दूसरी कौम को भिड़ाते हैं.

ई ससुरा कौम चीज़ बहुत ही करामाती है, जज़्बाती है और खुराफाती है. आप अपनी कौम को पिछडा साबित करो तो वो आपको बढिया नौकरी दिला सकती है, है ना करामाती! हर जुम्मे को मुल्लाजी एलान करते हैं कि कौम खतरे में है, है ना जज़्बाती !! और तो और अगर किसी को निबटाना हो, तो बस एक FIR दर्ज करवा दो पुलिस में कि, साहब उसने मेरी कौम को लेकर गाली दी. बंदा एट्रोसिटी में बंद. यानी कौम खुराफाती भी है. एक बहनजी ने तो कौम का हवाला देकर कई बार CM की कुर्सी कमा ली. हालांकि उनकी कौम आज भी वहीं खडी है. हाँ उनके सेंडलो की शान बढ गई है. एक और बहनजी ने तो कौमी एकता के नाम पे करोडो रुपये बटोर लिए. CBI आजकल उनके कौमी एकता पर्फ्यूम की जांच कर रही है. भैया ये कौम बडे ‘काम की चीज’ है.

आए दिन नेता लोग कौम के नाम पे वोट मांगते हैं, और शानदार हवेलियाँ हासिल करने तक कौम को चबाते रहते हैं. वहीं खबरिया चैनल कौम के नाम पे मसाला दिखाते हैं, और कौमी आग लगने पे अपनी TRP तापते रहते हैं. आप गलती से अपनी कौम भूल भी जाए तो ये भूलने नहीं देंगे. कौम ना हो तो ये सब कोमा में चले जाएँ.

बोले तो कौम के बगैर हिंदुस्तान चलता ही नहीं है. तो फिर हम भला कैसे बिना कौम के रहें. इसलिये कौम की इस भीड में हम लेकर आए हैं एक और Com. जी हाँ .Com, बोले तो..  www.Batangad.com !!

ये कौम सब कौमो से अलग है, क्योंकि इसका नारा है सबकी लेंगे. खबर, और  क्या? आप  भी  खामखाँ उल्टा-सीधा सोच लेते हैं ! कौमबख्त कहीं के !! तो भैया लाइक कीजिये, शेयर कीजिये, टैग कीजिये, क्योंकि ये अपनी कौम की इज्जत का सवाल है !!

  • बाबा बतंगड़ नाथ

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